Monetary Policy (मौद्रिक नीति),रेपो दर, रिवर्स रेपो दर

  •  दोस्तों आपने मौद्रिक नीति, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर ये शब्द बहुत बार सुना होगा की R.B.I ने रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, में बदलाव किये तो चलिए जानते आखिर इसका मतलब क्या होता है 
  • मौद्रिक नीति Monetary Policy क्या है?
  • मुद्रा के संबंध में बनाई गई नीति जिससे मुद्रा की मात्रा को बढ़ाया जाता है या घटाया जाता है मौद्रिक नीति कहलाती है!
  • मौद्रिक नीति बनाने के उद्देश्य                                                                                                      
  • ब्याज दरों को नियंत्रित करना 
  • मंदी और अवस्फीति को दूर करना 
  • अर्थव्यवस्था में कीमत स्थिरता बनाए रखना 
  • मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना 
  • मौद्रिक नीति समीति 
  • भारत सरकार द्वारा RBI एक्ट,1934 के तहत समीति गठित किया गया 
  • 2016 में समिति का गठन किया गया 
  • इस समीति का काम मौद्रिक नीति बनाना और उसकी समीक्षा करना 
  • समीति में कुल सदस्य की संख्या 6 थी 
  • पदेन अध्यक्ष – RBI का गवर्नर 
  • सदस्य –  RBI का उप गवर्नर 
  • सदस्य – केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित RBI का अधिकारी 
  • 3 और सदस्य जो केंद्र सरकार द्वारा नामित किया गया हो 
  • इनका कार्यकाल 4 वर्ष का होता है या जब तक केंद्र सरकार द्वारा कोई बदलाव नहीं किया जाए 
  • अप्रैल 2014 से पूर्व मौद्रिक नीति वर्ष में आठ बार बनाया जाता था 
  • 1 अप्रैल 2014 को उर्जित पटेल समीति की सिफ़ारिश पर अब वर्ष में 6 बार घोषित होता हैं 

  • मौद्रिक नीति में क्या बदला जाता हैं?
  1. रेपो दर 
  2. रिवर्स रेपो दर 
  3. बैंक दर 
  • रेपो दर क्या है? 
  • वह दर जिस पर RBI अपने वाणिज्यिक बैंक को अल्पकाल के लिए ऋण देता है और बैंक को उस ऋण के बदले RBI को ब्याज देना पड़ता है उसे रेपो दर कहते है 
  • रेपो दर का आम आदमी पर असर 
  • अगर बैंक को RBI से कम ब्याज पर ऋण मिलेगा तो बैंक भी आपको कर्ज कम ब्याज दर पर देगी अगर रेपो दर अधिक हुआ तो बैंक आम आदमी से अधिक ब्याज लेगी जिससे आपको लोन महंगा पड़ेगा 
  • रिवर्स रेपो दर क्या है?
  • जब बैंक अपनी अतिरिक्त जमा राशि को RBI के पास जमा कर देता है और बैंक को बदले में RBI से ब्याज मिलता है इसी को रिवर्स रेपो दर कहते है 

  • रिवर्स रेपो दर का आम आदमी पर असर
  • जब कभी बैंक के पास अधिक नकद हो जाता है तो RBI रिवर्स रेपो दर को बढ़ा देता है जिससे बैंक अपना पैसा RBI के पास अधिक ब्याज कमाने के लिए जमा कर देती है, जिससे बैंक के पास कम रकम रह जाती है, और देश में महंगाई बढ़ने का खतरा कम हो जाता है, रिवर्स रेपो दर बढ़ने पर बैंक अपना सारा पैसा RBI को जमा कर देता है, जिससे बैंक के पास पैसा नहीं रहने के कारण बैंक आपसे अधिक ब्याज लेगी और आपको लोन महंगा पड़ेगा रिवर्स रेपो दर कम होने पर बैंक कर्ज अधिक देगी, जिससे आपको ऋण कम ब्याज दर पर मिल जाएगा पर देश में महँगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा
  • RBI के निर्देशानुसार रिवर्स रेपो दर, रेपो दर की तुलना में सदैव कम होता हैं!
  • बैंक दर क्या है?
  • वह दर जिसपर RBI अपने वाणिज्यिक बैंक को लंबे समय के लिए राशि उधार देता है, बैंक दर कहलाता हैं 
  

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